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चीन के बाद पाकिस्‍तान – नेपाल भी खोल सकते हैं भारत के खिलाफ सैन्‍य मोर्चा: ग्लोबल टाइम्स की चेतावनी

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राकेश चंद्र

बीजिंग: चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के मुखपत्र ग्लोबल टाइम्स ने चेतावनी दी है कि यदि भारत – चीन सीमा पर तनाव जारी रहता है तो भारत को चीन, पाकिस्तान और नेपाल से सैन्य दबाव का सामना करना पड़ सकता है। उसके इस भड़काऊ बयान से नई दिल्‍ली और बीजिंग के बीच द्विपक्षीय तनाव बढ़ने की प्रबल आशंका है। शंघाई स्थित अकेदमी ऑफ सोशल साइंसेज के इंस्टीट्यूट ऑफ इंटरनेशनल रिलेशंस के शोध सहयोगी हू झिओंग का हवाला देते हुए समाचार पत्र में प्रकाशित एक संपादकीय में कहा गया है कि भारत एक ही समय में चीन, पाकिस्‍तान और नेपाल के साथ सीमा विवाद में लगा हुआ है। हू झिओंग ने कहा कि हालिया सारा घटनाक्रम चीन की जमीन पर हुआ ,इसलिए चीन की कोई जिम्मेवारी नहीं बनती, दोषी भारत हैं । पूरी रिपोर्ट के लिए पढ़े https://www.globaltimes.cn/content/1191969.shtml

तो अब क्या वह समय आ गया हैं कि भारत को तीन तीन मोर्चो पर एक साथ भिड़ना होगा ? या तीन मोर्चो पर अपनी सामरिक तैयारियों को अमली जामा पहनना होगा , जिसकी आशंका पूर्व सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत ने 2017 में डोकलाम विवाद की ख़त्म होने की बाद की थी , गौरतलब हैं कि सात जून 2017 को तत्कालीन भारतीय सेनाध्यक्ष जनरल बिपिन रावत ने कहा था कि सेना एक साथ ‘ढाई मोर्चों’ पर जंग के लिए हर वक्त तैयार है। ढाई मोर्चों से जनरल रावत का आशय चीन, पाकिस्तान और आंतरिक सुरक्षा के मोर्चे की तरफ था, लेकिन आज तीसरा मोर्चा नेपाल ने ले लिया हैं । तो क्या आज का भारत पांच मोर्चो पर लड़ने को तैयार हैं ? मौजूदा वक्त में भारत को चीन , पाकिस्तान , नेपाल , कोरोना व आंतरिक सुरक्षा से लड़ना हैं ।

ग्लोबल टाइम्स ने लिखा हैं कि चीन और पाकिस्तान की बीच विश्‍वसनीय रणनीतिक‍ि साझेदार है। नेपाल के साथ भी हमारे घनिष्‍ठ संबंध हैं। गौरतलब हैं कि पाकिस्‍तान और चीन प्रस्‍तावित बेल्‍ट एडं रो इनिशिएटिव के तहत महत्‍वपूर्ण साझेदार हैं।ग्लोबल टाइम्स आगे कहता हैं कि अगर भारत सीमा पर तनाव बढ़ाता है तो वह दो या दो से अधिक मोर्चों पर सैन्‍य दबाव का सामना कर सकता है। उन्‍होंने कहा कि तीन मोर्चों पर सामना करना भारत की सैन्‍य क्षमता के परे की बात है। इससे भारत की विनाशकारी हार हो सकती है।

सीमा रेखा में बदलाव का कोई इरादा नहीं

ग्‍लोबल टाइम्‍स के हवाले से कहा गया है कि चीन का सीमा रेखा में बदलाव का कोई इरादा नहीं है। लेख में आगे कहा गया है कि वास्‍तविक नियंत्रण रेखा पर दोनों सेनाओं के बीच जो खूनी संघर्ष हुआ उसके लिए भारतीय सैनिक जिम्‍मेदार हैं। भारतीय सैनिकों ने चीनी सैनिकों को उकसाया है। इसलिए सीमा पर 20 भारतीय सैनिकों की मौत के लिए वे खुद जिम्‍मेदार है ।

तो क्या भारत को अपना रक्षा बजट भी बढ़ाना होगा ?
चीन ने अपने रक्षा बजट को पिछले साल के 177.6 अरब डॉलर से 6.6 फीसदी बढ़ाकर 179 अरब डॉलर किया है। यह रकम भारत के रक्षा बजट का करीब तीन गुना है। भारत का 2020-21 में रक्षा बजट 3.37 लाख करोड़ रुपये का हैं जिसमें महज 6 फीसदी की बढ़ोतरी की गई है। रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक रक्षा आवंटन जीडीपी का 1.5 प्रतिशत बना हुआ है, यह 1962 के बाद से सबसे कम है। इस बात का जिक्र भाजपा के वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी की अध्यक्षता वाली एक प्राक्कलन समिति ने लोकसभा में पेश अपनी रिपोर्ट में किया था ।

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