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क्या कहता हैं ड्रैगन : चीन के उत्पाद भारतीयों के जीवन का हिस्सा बन गए हैं, उन्हें रिप्लेस करना मुश्किल हैं।

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राकेश चंद्र डंडरियाल

नई दिल्ली : भारत और चीन के बीच बॉर्डर पर बिगड़ते रिश्तों का जिक्र करते हुए चीन के सरकारी अख़बार ग्लोबल टाइम्स ने लिखा हैं , भारत के राष्ट्रवादियों ने चीन को बदनाम करने की कोशिश की है, लेकिन चीनी उत्पादों के बायकॉट की नीति सफल नहीं होगी। चीन के उत्पादन भारतीयों के जीवन का हिस्सा बन गए हैं और उन्हें रिप्लेस करना मुश्किल होगा।

ग्लोबल टाइम्स ने सोनम वांगचुक के वीडियो का भी जिक्र किया है,जिसमें उन्होंने चीन के स्मार्टफोन्स से लेकर ऐप्स तक चीनी प्रोडक्ट्स के बहिष्कार की अपील की थी। इसके अलावा Remove China Apps के नाम से एक ऐप भी लॉन्च किया गया था, जिसे अब गूगल ने प्ले स्टोर से हटा दिया है। हटाने से पहले तक यह ऐप वायरल हो गया था।

शंघाई इंस्टिट्यूट फॉर इंटरनेशनल स्टडीज के रिसर्च फेलो झाओ गांचेंग ने ग्लोबल टाइम्स से बातचीत में कहा, ‘भारत और चीन की सीमा पर शुरू हुआ तनाव बहुत गंभीर नहीं है दोनों ही देश इस मामले को जल्द ही सुलझा लेंगे।’ लेकिन उन्होंने भारत के राष्ट्रवादियों और भारतीय मीडिया पर चीन को लेकर गलत सूचनाएं फैलाने का आरोप भी लगाया ।


ग्लोबल टाइम्स आगे लिखता हैं चीन के सामान का बहिष्कार आसान नहीं हैं । चीनी सामान के बहिष्कार से भारतीयों को इस संकट के दौर में और नुकसान होगा क्योंकि चीनी उत्पाद बहुत सस्ते हैं। चीन के एक अन्य विश्लेषक ने कहा कि यह पहला मौका नहीं है, जब चीन के प्रोडक्ट्स को न खरीदने की अपील की गई है। भारत और चीन के संबंधों में जब भी उतार-चढ़ाव आया है तो इस तरह की अपीलें की गई हैं। हालांकि भारतीयों के लिए चीन के उत्पादों को खारिज करना आसान नहीं होगा क्योंकि इनकी क्वॉलिटी काफी अच्छी है।

बीते साल द्वपक्षीय व्यापार क़रीब 90 अरब डॉलर का था इसमें क़रीब दो तिहाई हिस्सा भारत में चीनी निर्यात का था।भारत की दवा बनाने वाली कंपनियां क़रीब 70 फ़ीसदी एपीआई चीन से आयात करती हैं।साल 2018-19 के वित्तीय वर्ष में देश की फर्मों ने चीन से 2.4 अरब डॉलर मूल्य की दवाइयां और एपीआई आयात किए।

भारत और चीन का व्यापार 2001-02 में महज तीन अरब डॉलर था जो 2018-19 में बढ़कर करीब 87 अरब डॉलर पर पहुंच गया। भारत ने चीन से करीब 70 अरब डॉलर मूल्य का आयात किया जबकि इसी अवधि में चीन को करीब 17 अरब डॉलर का निर्यात किया ।

2015-16 के वित्त वर्ष में भारत का चीन को निर्यात $2,390 मिलियन डॉलर था जो कि भारत के कुल निर्यात का केवल 3.59% था।
दूसरी तरफ चीन की तरफ से भारत को निर्यात $14,704 मिलियन डॉलर था,जो कि भारत के कुल आयात का 15% था।

क्या क्या खरीदते हैं हम चीन से
खिलौने,बिजली उत्पाद, कार और मोटरसाइकिल के कलपुर्जे, दूध उत्पाद,उर्वरक,कम्प्यूटर,एंटीबायोटिक्स दवाई, दूरसंचार और उर्जा क्षेत्र से।

चीन हमसे क्या खरीदता हैं
हीरे 36 फ़ीसदी , इसके अलावा सूती वस्त्र, हस्तशिल्प उत्पाद, : कृषि उत्पाद,कच्चा लेड, लौह अयस्क,स्टील, कॉपर,टेलीकॉम सामाग्री।

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