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जल्द आ रहा है पहाड़ी लिंगुडे का अचार ,हार्क अलकनंदा स्वायत्त सहकारिता समूह कालेश्वर ने की तैयारियां

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सतेंद्र सिंह बिष्ट
रुद्रप्रयाग/कालेश्वर।प्रकृति ने उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों को औषधीय गुणों से युक्त जड़ी बूटियों के अलावा कंद मूल फलों का प्रचुर भंडार दिया हैं , जिसका उपयोग हम अपने दैनिक जीवकोपार्जन के लिए नहीं कर पा रहे हैं। ये बात हम नहीं, ये बात कह रहे हैं हार्क के संयोजक डॉ महेंद्र सिंह कुंवर, डॉक्टर कुंवर ने दूरभाष पर जानकारी देते हुए बताया, कि पहाड़वासियों ने अपने स्थानीय फल ,फूलों औषधीय युक्त अनाजों से होने वाले लाभ की जानकारियां लेने की कभी कोशिश ही नहीं की, और न ही किसी ने उन्हें बताई ।

लिंगुडे की खरीद
डॉक्टर कुंवर का कहना है मैने तो उत्तराखण्ड के पहाड़ी क्षेत्रों में रहकर स्थानीय अनाजों , कंदमूल फलों से हार्क अलकनंदा स्वायत्त सहकारिता कालेश्वर के माध्यम से पहाड़ी क्षेत्रों के जंगलों में होने वाली जंगली सब्जी को अपने सदस्यों से अचार बनाने के लिए 1350 किलोग्राम लिंगुडे की खरीद करवाई।उनका कहना है कि मेरा लक्ष्य 2000 किलो का है। लिंगुडे का अचार स्थानीय लोगो के बीच बेहद लोकप्रिय हो रहा है। ये हमारी स्थानीय पहचान भी है। पिछले वर्ष सौ प्रतिशत बिक्री हुई , हमारे पास स्टॉक ही ख़त्म हो गया था। इससे दो फायदे हुए , एक तो उन लोगों को जो इसे तोड़कर हमारे पास आए, व दूसरा वे लोग जो हार्क अलकनंदा स्वायत्त सहकारिता कालेश्वर से जुड़े हैं उन्हें भी फायदा हुआ , लेकिन इस साल लॉकडाउन के कारण लोगों को इसे हार्क के केन्द्रो तक पहुँचाने की कठिन चुनौती का सामना करना पड़ रहा हैं।

प्रचार प्रसार जरुरी : डॉक्टर कुंवर कहते हैं ,सब कुछ यंही तो है, बस उसे समझने ,संवारने व प्रचार-प्रसार की जरूरत है। लिंगुडे का अचार बेहद लोकप्रिय हो रहा है। ये हमारी स्थानीय पहचान भी है। डॉ महेंद्र सिंह कुंवर ने कहा कि जल्द ही हम तिमले का आचार बनाकर लोगों के बीच मार्केट में ला रहे हैं।

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