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जल संचय ही जीवन संचय

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सुधीर सुंदरियाल- भलु लगद/ फीलगुड

पौड़ी गढ़वाल। कोरोना वैश्विक महामारी ने साबित कर दिया है कि जीवन संचय के आगे धन संचय कहीं नहीं टिकता। आज दुनिया की सारी ताकत मानव जीवन को सुरक्षित करने के लिए तन, मन, धन, से जुटी हुई है। खुशी की बात यह है कि जल्दी ही जीवन संचय की इस कोरोना जंग में मानव विजयी होगा, क्योंकि इसका इलाज वैज्ञानिकों द्वारा लैब में सम्भव है।लेकिन इस महामारी पर विजय हासिल करने मात्र से मानव जीवन संचय होगा यह सत्य नहीं है।कई अन्य चुनौतियां भी आज मानव जीवन पर बड़ा संकट बन कर आई हैं। जिनमे मुख्य रूप से जल संकट सबसे बड़ी चुनौती बन कर उभरा है।

इस संकट का हल दुनिया के ना तो किसी वैज्ञानिक और ना ही किसी लैब द्वारा हल होने वाला है।लेकिन यह संकट ऐसा है जो मानव की अज्ञानता से शुरू होगा और सामूहिक रूप में लोगों की जागरूकता पर संकट का हल हो जाएगा। कुदरतन इस धरती पर जो पानी बरस रहा है वो बहुत ज्यादा है। अगर हम इस बरसाती पानी का संग्रह करें तो यह संकट चुटकी में हल हो जाएगा। जल का यह संचय मानव जीवन का संचय होगा लेकिन इस संचय में हमारी छोटी सी लापरवाई जीवन के ‘कल’ पर बड़ा संकट हो जाएगा।इसलिए मेरे सभी जागरूक क्षेत्रवासियो आज हम जीवन के इस क कल के लिए, जल संरक्षण की मुहिम में बढ़ चढ़ कर भाग लें। यह मुहिम किसी जाति, धर्म, क्षेत्र, या राजीनीतिक विचारधारा की मुहिम नहीं है बल्कि जागरूक लोगों द्वारा अपने आने वाले जीवन के सुखमय कल के लिए मुहिम है।
पहाड़ों का बरसाती पानी पहाड़ में रोकने की जल संरक्षण की इस मुहिम के तहत *4 सितम्बर 2020 को ग्राम नाई में एक जलाशय निर्माण के लिए कुछ जागरूक लोग मुहं पर मास्क और फिजिकल डिस्टेंसिंग के साथ कुदाल फावड़ा लेकर *जल संचय* के लिए काम करेंगे।
पहाड़ों को पानी पिलाने के इस पुनीत कार्य मे आप भी सादर आमंत्रित हैं। आपकी सहभागिता श्रमदान की उस परम्परा को आगे बढ़ाएगी जिससे चौंदकोट जन शक्ति जैसे मार्ग बने जो सबके लिए ऐतिहासिक और अनुकरणीय हो गए हैं।

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