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भारतीय स्टेट बैंक धौलछीना तीन महीने में ठीक नहीं करवा पाया एक प्रिंटर को, धिक्कार है जिले के नेताओं और अधिकारियों को ।

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संजय कुमार अग्रवाल

धौलछीना (अल्मोड़ा।) ग्राहक सेवाओं को लेकर अक्सर चर्चा में रहने वाले भारतीय स्टेट बैंक धौलछीना में 3 महीने से प्रिंटर खराब होने से लोगों को भारी फजीहत का सामना करना पड़ रहा है। धौलछीना स्थित भारतीय स्टेट बैंक की शाखा लंबे समय से अपनी लचर व्यवस्थाओं के साथ चल रही है। आए दिन बैंक के प्रिंटर मशीन, कंप्यूटर खराब हो जाना आम बात है। यही नहीं बैंक का प्रिंटर पिछले 3 महीनों से खराब पड़ा है। जिस कारण ग्राहकों की नई पासबुक नहीं बन पा रही है।

महीनों से खराब पड़े प्रिंटर को ठीक करवाने पर बैंक प्रबंधन द्वारा कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। ठीक कराने को जिला मुख्यालय भेजा है बता कर जनता से पल्ला झाड़ रहे हैं! जिसके चलते उपभोक्ताओं में रोष है।वर्तमान में सरकार द्वारा चलाई जा रही कई डिजिटल ऑनलाइन योजनाओं आदि योजनाओं में बैंक पासबुक की छायाप्रति मांगी जा रही है। लेकिन बैंक शाखा में प्रिंटर खराब होने से पासबुक नहीं मिल पा रही है।

ग्रामीण दूरदराज से हर रोज पासबुक बनवाने तथा पुरानी भर चुकी पासबुक की नई पासबुक बनवाने बैंक शाखा में पहुंचते हैं पर हर बार उन्हें प्रिंटर खराब होने की जानकारी देकर दुत्कार कर भेज दिया जाता है ! इसके चलते उन्हें मायूस होकर लौटना पड़ता है। पिछले 3 महीनों में लगभग 745 से अधिक स्कूली बच्चों समेत उपभोक्ता पासबुक का इंतजार कर रहे हैं। ज्ञात हो कि जून महीने में बैंक की अव्यवस्थाओं को लेकर व्यापार मंडल धौलछीना वह प्रधान संगठन भैंसिया छाना ने क्षेत्रीय जनता तथा उपभोक्ताओं को साथ लेकर 29 जून को बैंक में तालाबंदी कर दी थी। एसबीआई के रीजनल ऑफिसर अल्मोड़ा वह उच्चाधिकारियों से मिले आश्वासन के बाद दो से तीन माह के अंदर बैंक की व्यवस्था व एटीएम ठीक करवाने के लिखित आश्वासन पर बैंक का ताला खोला गया। लेकिन तब से अब तक बैंक की व्यवस्थाओं में कुछ भी बदलाव नहीं आया है।

शिवाय ब्रांच मैनेजर को बदलने के जिससे न तो एटीएम ही ठीक हुआ और ना ही बैंक की व्यवस्थाओं में सुधार हुआ। मात्र 2 कर्मचारी एक बैंक मैनेजर तथा कैशियर के सहारे चल रहा है 4500 से अधिक उपभोक्ताओं का लेनदेन बैंक। बैंक में 2 क्लर्क वह एक कैश ऑफिसर के पद रिक्त हैं! इसी सप्ताह कैश ऑफिसर का भी स्थानांतरण हो चुका है ।बैंक में टोकन की व्यवस्था नहीं है जिस कारण ग्राहकों को घंटों चेक व पासबुक हाथ में लेकर लाइन मैं खड़ा रहना पड़ता है। कई बार बुजुर्ग उपभोक्ता गश खाकर गिर पड़ते हैं। ग्राहकों को चाय पानी तो दूर बैठने की भी उचित व्यवस्था नहीं है सोशल डिस्टेंसिंग का किसी प्रकार का पालन नहीं हो रहा है । बैंक मैं अपनी बारी का इंतजार कर रहे ग्राहकों के लिए न्यूज़पेपर तो दूर पीने के पानी की भी व्यवस्था नहीं है। वहीं कई उपभोक्ताओं ने बताया कि बैंक स्टाफ का ग्राहकों के प्रति व्यवहार ठीक नहीं रहता है। बैंक कर्मचारियों द्वारा ग्राहकों को धक्का देकर बैंक के बाहर खड़ा किया जाता है। वाकई ग्राहकों के साथ मारपीट तक हो चुकी है। व्यापार मंडल अध्यक्ष दरबान सिंह रावत तथा प्रधान संगठन अध्यक्ष चंदन सिंह मेहरा ने आरोप लगाया कि पिछले कई वर्षों से बैंक ने ग्राहक गोष्टी तक नहीं कराई है। फिर से एक बार बैंक का एटीएम ठीक करवाने वह बैंक की व्यवस्थाएं को लेकर जिला अधिकारी को ज्ञापन सौंपेंगे वह पुनः आंदोलन करने की चेतावनी दी है!*

केस–1…रीता नेगी ग्राम ऊटियां.. मैंने लगभग 1 महीने पहले अपना खाता खुलवाया। मैं गर्भवती महिला हूं आंगनबाड़ी द्वारा खाता नंबर मांगा जा रहा है। 1 महीने में कई बार बैंक के चक्कर काट चुकी हूं पासबुक नहीं मिली।

केस–2… आरती तिवारी, ग्राम खाकरी.. डेढ़ महीना पहले खाता खुलवाया गौरा देवी कन्या धन योजना के लिए पासबुक की छायाप्रति चाहिए। महीने में चार से पांच बार बैंक के चक्कर लगा चुकी हूं लेकिन अभी तक पासबुक नहीं मिल पाई है। हर बार ₹100 आने जाने मैं खर्च हो जा रहा है

केस 3 .. माया देवी ग्राम कलौन.. जून में खाता खुलवाया था तब से अब तक दर्जनों बार पासबुक के लिए बैंक आ चुकी हूं। हर बार प्रिंटर का बहाना बनाकर वापस भेज दिया जाता है।

केस -4 … आनंद सिंह ग्राम दियारी… जुलाई में खाता खुलवाया था तब से अब तक तीन किस्त भी जमा हो चुकी हैं। लेकिन पासबुक अभी तक नहीं मिली।

।। बैंक कर्मचारी पासबुक नहीं कागज में दे रहे हैं खाता नंबर ।।
विभिन्न सरकारी योजनाओं में लोगों से खाता नंबर के साथ पासबुक की छायाप्रति मांगी जा रही है। लेकिन धौलछीना एसबीआई में महीनों से पासबुक प्रिंटर खराब पड़ा हुआ है। जिस कारण पासबुक नहीं मिल पा रही है। नए ग्राहकों को पन्ने में *लिखकर नंबर दिया जा रहा है। नए खाताधारकों को बैंक द्वारा एक पर्ची में खाता नंबर लिखकर दे दिया जा रहा है।।
बैंक में लगी पासबुक एंट्री मशीन भी अक्सर खराब ही रहती है। महीने में लगभग 20 दिन मशीन शोपीस बनी रहती है।

इधर एसबीआई के शाखा प्रबंधक गुलशन कुमार ने बताया … खराब प्रिंटर को ठीक करवाने के लिए भिजवाया है तथा नए प्रिंटर के लिए भी आवेदन किया है जल्द ही समस्या दूर हो जाएगा। एटीएम ठीक कराने की प्रक्रिया चल रही है कुछ समस्याएं बैंक के स्टाफ की कमी के चलते बनी हुई है।

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