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अगर कुछ कर गुजरने की अभिलाषा हो तो मिलिए रुद्रप्रयाग जिले के युवाओं रूपेश और प्रवींद्र राणा से

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रामरतन सिह


जखोली। पूरे देश मे कोरोना जैसी खतरनाक बिमारी के आगोश में है। लगभग सात महीने का समय गुजर चुका है जिसके चलते बहारी राज्यो मे नौकरी करने वाले उतराखंड के लाखों लोग आज इस महामारी के चलते बेरोजगार होकर अपने-अपने घरो मे बैठे है। भले ही सरकार प्रवासियो को गाँवो मे स्वरोजगार देने की नीति पर काम कर रही हो पर सरकार की यह निति प्रवासियों के काम आने वाली नही है।आलम यह है कि कई प्रवासी अपने को ठगा महसूस कर रहे हैं। व एक बार फिर करोना जैसे महामारी से निडर होकर फिर से बहारी राज्यों मे अपनी रोजी रोटी कमाने के लिए निकल गये है। इस बीच कई युवा ऐसे भी है जिन्होंने स्वयं के दम पर बिना किसी सरकारी सहायता के अपने ही संसाधनों से अपनी रोजी रोटी के साधन जुटा रहे है। जखोली ब्लाक के अन्तर्गत बुढना गांव के रहने वाले दो प्रवासी रुपेश सिह गहरवार और प्रवीन्द्र राणा जो कि इससे पूर्व बहारी राज्य मे नौकरी करते थे ,और लाँकडाउन के चलते गांव मे बेरोजगार बैठे थे। इन बेरोजगारों ने बुढना के मुख्य बाजार फतेड़ू मे चप्पल बनाने वाली मशीने लगा डाली।इनका कहना है कि इन मशीनों को लगाने मे हमारा लगभग तीन लाख तक लागत आयी,आज इस छोटी सी चप्पल बनाने के कारखाने का माह अगस्त मे शुरुआत की गयी थी।

रुपेश सिह का कहना है कि शूरुआती दौर मे हम इस हाईड्रोलिक मेन्यूअल मशीन से लगभग प्रतिदिन दो सौ चप्पलें तैयार करते थे तथा उनको उचित कीमत पर बेचते थे, उनका ये भी कहना है कि जैसे ही धीरे धीरे प्रोडक्शन मे बढोतरी होगी वैसे ही अन्य बेरोज गारों को भी हम रोजगार देगे ताकि, वे भी अपने परिवार का पालन पोषण कर सके।यही नही रूपेश सिंह और प्रवीन्द्र सिह का कहना है कि जैसे ही धीरे धीरे काम मे बढोतरी कर बहार के बाजारों मे चप्पलो की सप्लाई की जायेगी।

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