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आधी कांग्रेसी कैबिनेट से, कैसे नैया पार करेंगे त्रिवेंद्र ?

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राकेश चंद्र डंडरियाल

देहरादून : बीजेपी ने 2017 में 56 सीटें जीतकर प्रचंड जनमत से उत्तराखंड में अपनी सरकार बनाई ,और इसी जीत को और बड़ी जीत में बदलते हुए 2019 में भी 61.66 % बोट बैंक को अपने कब्जे में रखते हुए पांचों लोकसभा की सीटें जीती । त्रिवेंद्र सिंह रावत को सर्वसम्मति से मुख्यमंत्री बनाया गया। बनाया भी जाना चाहिए था , अनुभव की भी कमी नहीं थी , पहले भी मंत्री रहा चुके थे।

खैर जो हुआ पार्टी हाई कमान ने शायद अच्छा ही सोचा होगा , लेकिन मंत्रिमंडल के चयन में बीजेपी हाई कमान से शायद बहुत बड़ी चूक हुई , और वह थी बीजेपी में शामिल किए गए कोंग्रेसियों को आधी सरकार दे देना , जी हां आधी सरकार , शायद पार्टी हाई कमान को लगा कि कांग्रेस से जो लोग उनकी पार्टी में शामिल हुए हैं उन्हें भी पारितोषित मिलना चाहिए , लेकिन तीन साल गुजरने के बाद अगर उनकी उपलब्धियों पर नजर डालें तो जीरो हैं , ऐसे में मुख्यमंत्री पर दोने तरफ से दबाव हैं , एक परफॉरमेंस का और दूसरा भारी और भरकम व कद्दावर नेताओं का जो कि पहले कांग्रेस में थे । मुख्यमंत्री पार्टी के लोगों को मंत्रिमंडल में शामिल करना चाहते हैं लेकिन इन नेताओं का उनपर व पार्टी पर जबरदस्त प्रभाव हैं , और सरकार को बदनाम करने में ये नेता कोई अवसर नहीं छोड़ते हैं , अब मुख्यमंत्री करे तो करे क्या ? गरम दूध हैं न ही घूट सकते ना ही थूक सकते?

अब चर्चा उस गणित पर चर्चा कर लेते हैं जिसमें सरकार बीजेपी की कम और बागियों की सरकार ज्यादा लगती हैं। मई 2016 में कांग्रेस के 9 विधायक बिना शर्त बीजेपी में शामिल हो गए’ थे , उनमें से आज मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह की कैबिनेट में पांच मंत्री हैं , चार तो ऐसे हैं जो प्रमुख ओहदो पर बैठे हैं , जबकि बीजेपी के मुख्यमंत्री सहित चार ही लोग मंत्रिमंडल में हैं।

कांग्रेस के नेता जो बीजेपी में कैबिनेट मंत्री हैं
सतपाल महाराज
हरक सिंह
यशपाल आर्य
सुबोध उनियाल
रेखा आर्य

बीजेपी के मंत्री
मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत
मदन कौशिक
अरविन्द पांडेय
धन सिंह रावत

तो क्या बीजेपी में नेताओं का अकाल पढ़ गया था ? आखिर क्यों नहीं बहुगुणा के तर्ज पर उन्हें भी साइडलाइन किया गया ? और अगर माना कि आपने उनकी बफादारी पर उन्हें मंत्री बनाया, तो तीन साल में उन्होंने ऐसा क्या कर दिखाया हैं कि आप उन्हें कंधो पर उठाये जा रहे हों , आखिर क्या हैं उनकी तीन साल की उपलब्धियां ? क्योँ नहीं मुख्यमंत्री की दी गई पूरी ताकत , और अगर दी भी तो दोनों हाथ बाँध दिए गए। क्योँ बीजेपी अपने पार्टी कार्यकर्ताओं नजरअंदाज कर रही हैं ?

प्रदेश मंत्रिमंडल में इस समय तीन सीटें रिक्त हैं। मुख्यमंत्री सहित कुल 9 मंत्री हैं। पिछले साल कैबिनेट मंत्री प्रकाश पंत का निधन होने के बाद तीन सीट खाली हैं , इन पदों पर क्यों नहीं बीजेपी के अनुभवी विधायकों को प्राथमिकता दी जा रही हैं ? यह पहेली समझ से परे हैं , हर वक्त सुनाई देता हैं , कैबिनेट बिस्तार को हरी झंडी मिल गई हैं , लेकिन अब तीन साल का समय गुजर गया हैं , बीजेपी अगर अब नहीं चेती तो शायद 2022 में कांग्रेस से बीजेपी में आए खोटे सिक्कों को भुनाना मुश्किल हो जाएगा । अब वक्त हैं कि मुख्यमंत्री को पूरी छूट दी जाए कि जो परफॉर्म करेगा वही कैबिनेट का भाग रहेगा , काम न करने वालों के लिए त्रिवेंद्र कैबिनेट में कोई जगह नहीं होनी चाहिए।

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