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त्रिवेंद्र का जोर – विकास की ओर

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राकेश चंद्र डंडरियाल

देहरादून : 18 मार्च 2017 को उत्तराखंड में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनी,और वह भी प्रचंड बहुमत से ,लोकतंत्र में जनता जनार्दन होती है। बीजेपी को प्रदेश की जनता ने इस वादे के साथ सत्ता में बिठाया था, कि सबका साथ -सबका बिकास के नारे को चरितार्थ किया जा सके। तब से अब तक विश्वास की यह डोर लगभग सवा तीन साल का सफर पूरा कर चुकी है। इस दौरान सरकार को कोविद 19 से भी जूझना पड़ा है , और अब तक के नतीजों से लगता है कि सरकार का स्थिति पर पूर्ण नियंत्रण है। राज्य की डोर त्रिवेंद्र सिंह रावत के हाथो में इस आशा के साथ दी गईं कि, राज्य का चहुमुखी विकास हो सके।

अब अगर सवा तीन साल के बाद उनकी सरकार की उपलब्धियों पर नजर डालते है, तो कई मामलों में ऐतिहासिक और साहसिक फैसले उनकी सरकार ने लिए ,खासकर भ्रष्टाचार पर प्रभावी अंकुश, उत्तराखंड की राजधानी गैरसैण पर लिया गया उनका अभूतपूर्व फैसला, देवस्थानम बोर्ड का गठन , भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टालरेंस की नीति जो कि अब तक सफल रही हैं ।

दरअसल 2017 में जब विधानसभा चुनाव हुए तो सबसे बड़ा मुद्दा था राज्य में व्याप्त भ्रष्टाचार। जनता को लगता था कि सरकार माफिया के हाथों में खेल रही है। भ्रष्टाचारी लोग ही सरकार चला रहे हैं। बीजेपी ने चुनावों के दौरान जनता से वादा किया कि भ्रष्टाचार पर जीरो टालरेंस और विकास ही उनकी प्राथमिकता होगी। सरकार ने सत्ता में आने के बाद सबसे पहले ऊधमसिंहनगर के एनएच-74 घपले में लिप्त वरिष्ठ अफसरों के खिलाफ कार्रवाई की। इन तीन साल में भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने में सरकार कामयाब रही और लगभग 150 लोगों पर कार्रवाई की गईं। हाल ही में अक्षम, बीमार, और लंबे समय से अवकाश पर रहने वाले कर्मचारियों को अनिवार्य सेवानिवृत्ति का भी सरकार ने फैसला किया है।
नौकरशाही के मामले में त्रिवेंद्र सरकार ने पूर्व सरकारों की नीति नहीं अपनाई , उन्होंने इस पर अंकुश लगाया , तथा उत्तराखंड के अधिकारियों को आगे बढ़ाया , जबकि पूर्ववर्ती सरकारों ने दो खास (पूर्वी )प्रदेशों के लोगों को ही आगे बढ़ाया , और अपनों को पीछे धकेल दिया था। त्रिवेंद्र सिंह ने सत्ता में आते ही उत्तराखंड के नौकरशाहों को सम्मान दिया, उसी का असर राज्य में देखने को मिल रहा है। सरकार पर आज तक कही से भी किसी भ्रस्टाचार का आरोप नहीं लगा है। उन्होंने खासकर जिलाधिकारियों को पूरा काम करने का मौका दिया , जिससे कि वे अपनी योग्यता को सिद्ध कर सकें।

बुनियादी सुबिधाओं पर ध्यान
बुनियादी सुविधाओं जैसे सड़क, बिजली, पानी की समस्या, पर सरकार ने बेहतर काम किया हैं । बिगत सवा तीन साल के दौरान प्रदेश में डबल इंजन सरकार का असर साफ-साफ दिखाई दिया है। केंद्र सरकार ने करीब एक लाख करोड़ रुपये की विभिन्न परियोजनाएं प्रदेश के लिए स्वीकृत की हैं। इनमें बहुत सी योजनाओं पर तेजी से काम भी चल रहा है। इनमें ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना, चारधाम सड़क परियोजना ऑल वेदर रोड़, केदारनाथ धाम पुनर्निर्माण, भारतमाला परियाजना, जमरानी बहुद्देशीय परियोजना, नमामि गंगे, देहरादून स्मार्ट सिटी , साल 2024 तक हरिद्वार-ऋषिकेश और देहरादून के बीच मेट्रो चलाने की योजना को भी राज्य की ओर से मंजूरी मिल चुकी हैं जल्द ही केंद्र से भी इस पर फैसला ले लिया जाएगा।

इसके अलावा हाल ही में बद्रीनाथ के लिए भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रदेश सरकार से रोड मैप माँगा हैं। बदरीनाथ का मास्टर प्लान सरकार द्वारा तैयार हो चुका है जल्द ही सम्बंधित पक्षों से बात करके इसे प्रधानमंत्री कार्यालय को भेजा जाएगा। ऑल वेदर रोड और ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन पर तेजी से काम चल रहा है। देवबंद रुड़की रेलमार्ग पर जल्द काम शुरू होने जा रहा है , एनसीसी अकादमी का शिलान्यास हो चुका है , देश की सेवा में शहीद हुए सैनिको के सम्मान में दून में सैन्य धाम बनने जा रहा है।2022 तक सभी गांवों को सड़क से जोड़ने का लक्ष्य रखा है।

अटल आयुष्मान योजना
राज्य में अटल आयुष्मान योजना के तहत हर व्यक्ति को पांच लाख रुपये तक के इलाज की सुविधा प्रदान की गई है, और अब तक चालीस लाख गोल्डन हेल्थ कार्ड बन चुके है। योजना के जरिए आम जनता बेहतर स्वास्थ्य सुबिधा प्राप्त कर रही है।

कृषि विकास
सरकार का लक्ष्य हैं कि उत्तराखंड को जैविक राज्य बनाया जाए। परंपरागत कृषि विकास योजना के तहत प्रदेश के सभी जनपदों में अलग-अलग फसलों के 3900 जैविक क्लस्टर विकसित किए जा रहे हैं।सीमांत तहसीलों के लिए मुख्यमंत्री सीमांत क्षेत्र विकास योजना शुरू की है।
जैविक कृषि विधेयक-2019 को विधानसभा में पारित करने के साथ ही उत्तराखंड जैविक एक्ट लाने वाला देश का पहला प्रदेश बन गया है।

स्वास्थ्य
पर्वतीय क्षेत्रों में डाक्टरों की संख्या पहले से दोगुनी की गई है । टेलीमेडिसीन और टेलीरेडियोलोजी भी फायदेमंद साबित हो रही हैं। ग्राम स्तर पर स्वास्थ्य उपकेंद्रों का हैल्थ एंड वैलनैस सेंटर के रूप अग्रेडेशन कर रहे हैं।

आर्थिक प्रगति
राज्य में पहली बार इंवेस्टर्स समिट का आयोजित किया गय। पर्वर्तीय जिलों से पलायन रोकने के लिए होम स्टे योजना, तथा वीर चंद्र सिंह गढ़वाली योजनायें काफी लाभकारी शाबित हो रही है।

2016 -17 में उत्तराखंड में प्रति व्यक्ति आय जहाँ एक लाख , 61 हजार 172 थी, वह अब 198738 रुपये हो गई हैं। प्रति व्यक्ति आय में पिछले साल की तुलना में 16418 रुपये का इजाफा हुआ हैं।
उत्तराखंड की प्रति व्यक्ति आय
2018-19            198738 रुपये 
2017-18            182320 रुपये
2016-17            161172 रुपये

पर्यटन प्राथमिकता
राज्य की आर्थिकी को और मजबूत करने के लिए मुख्यमंत्री पर्यटन को अपनी प्राथमिकता मानते है। इसी के तहत 13 डिस्ट्रिक्ट 13 न्यू डेस्टिनेशन स्कीम लागू की गईं है , उत्तराखंड में पर्यटन की अपार संभवनाएं है। टिहरी झील से सी-प्लेन की सेवा उपलब्ध करने के लिए प्रदेश सरकार और केंद्र सरकार ने एमओयू किया है। सी-प्लेन सेवा के शुरू होने से पर्यटन को और बढ़ावा मिलेग। वीर चंद्र सिंह गढ़वाली पर्यटन स्वरोजगार योजना के तहत इलेक्ट्रिक बस खरीदने पर 50 प्रतिशत या 15 लाख तक सब्सिडी मिल रही है ।

एयर कनेक्टीवीटी
एयर कनेक्टीवीटी पर विशेष जोर दिया गया है। उड़ान योजना के दूसरे चरण में देहरादून से पिथौरागढ़ हवाई सेवा ,हिडन से पिथौरागढ़ के लिए उड़ान शुरू हो चुकी है।देहरादून के सहस्त्रधारा से गौचर चिन्यालीसौड़ सेवा शुरू हो चुकी है।

विद्युतीकरण
सौभाग्य योजना के तहत प्रदेश के हर घर तक बिजली पहुंचा दी गईं है। आजादी के बाद से अभी तक राज्य में 94 गांव ऐसे थे, जहां बिजली नहीं थी। सरकार ने इन गांवों में विद्युतीकरण कर दिया है। बिजली वितरण लॉस में कमी की गई। प्रदेश में 24 घंटे बिजली की आपूर्ति सुनश्चित की गईं है।

शिक्षा
उत्तराखंड के सभी सरकारी स्कूलों में NCERT की किताबें अनिवार्य कर दी गई हैं , यह फैसला शैक्षणिक सत्र 2018-19 से लागू कर दिया गया हैं। उत्तराखंड वर्चुअल क्लास शुरू करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है। हाल ही में सरकार ने फैसला लिया है कि पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी के नाम पर प्रदेश के सभी 95 विकासखंडों में अंग्रेजी माध्यम के दो-दो स्कूल खोले जायेंगे ताकि प्राइवेट स्कूलों को टक्कर दी जा सके। कक्षा एक से 12वीं तक के ये स्कूल सीबीएसई से संबद्ध होंगे और इनके लिए शिक्षकों का कैडर भी अलग से होगा। राजकीय स्कूलों में वर्चुअल क्लासेज शुरू की गई हैं।

भ्रष्टाचार पर प्रभावी अंकुश लगाते हुए शासन ने करोड़ो रुपये के छात्रवृत्ति घोटाले में आरोपी समाज कल्याण बिभाग के संयुक्त निदेशक गीताराम नौटियाल की बहाली के आदेश को निरस्त कर दिया था , इस सम्बन्ध में शासन से 18 मई को निलंबन से बहाली के आदेश जारी हुए थे, जिसके बाद मुख्यमंत्री ने तुरंत कारवाही करते हुए उनके बहाली आदेश को निरस्त कर दिया था ।

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