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उत्तराखंड में बेलगाम अफसरशाही , विधायक लगाएंगे मुख्यमंत्री से गुहार, रामनगर में नाराज ज्येष्ठ उपप्रमुख का स्तीफा

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राजसत्ता न्यूज़ ब्यूरो

देहरादून। प्रदेश के नवनियुक्त मुख्यसचिव ओमप्रकाश की प्रशासनिक घुट्टी भी अधिकारियों को मनमानी से रोक पाने में असफल सिद्ध हो रही हैं। अधिकारी हैं कि जनता के प्रतिनिधियों की सुंनने को ही तैयार नहीं हैं। अधिकारियों की मनमानी इस कदर बढ़ गई है कि वे मंत्रियों तक को कोई अहमियत नहीं दे रहे हैं। विधायक तो दूर की बात हैं । इसी बात से नाराज बीजेपी के लगभग सात विधायक मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को शिकायत करने के लिए मुख्यमंत्री दरबार का रुख कर सकते हैं। विधायकों को डर हैं कि उनके इलाकों में अगर काम नहीं होंगे तो वोट कैसे मिलेंगे। आलम यह हैं कि राज्य के कैबिनेट मंत्री यशपाल आर्य, शिक्षा मंत्री अरविंद पांडेय ,राजकुमार ठुकराल और जसपुर विधायक आदेश चौहान अफसरों के रवैये को लेकर सार्वजनिक रुप से नाराजगी जता चुके हैं। किच्छा विधायक राजेश शुक्ला को तो अफसरों के रवैये को लेकर धरने पर बैठना पड़ा था ।

उत्तराखंड में अफसरशाही की मनमानी का यह पहला मामला नहीं हैं मंत्री और विधायक सार्वजनिक मंचों पर इस बात का जिक्र करते रहते हैं। हाल ही में कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक की एक बैठक में एक सचिव के अलावा कोई सचिव नहीं पहुंचे, जिसके बाद नाराज मंत्री बैठक छोड़कर चले गए। इस पर मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को हस्तक्षेप करना पड़ा। मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद तत्कालीन मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह ने शासन के सभी अफसरों को इस संबंध में आदेश जारी किए। इसी साल मई में ऊधमसिंह नगर के एमएनए के फरमान से नाराज 40 वार्ड के पार्षदों ने दिया सामूहिक इस्तीफा दे दिया था।

आज के ताजा घटनाक्रम में रामनगर के खंड विकास अधिकारी की कार्यशैली से नाराज चल रहे ज्येष्ठ उपप्रमुख सहित 26 क्षेत्र पंचायत सदस्‍यों ने भी सामूहिक इस्तीफे सहायक पंचायत अधिकारी को सौंप दिए। क्षेत्र पंचायतों के इस फैसले से खंड विकास कार्यालय में हड़कंप मच गया।

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