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नैनीताल हाईकोर्ट ने सल्ट ब्लॉक के थापला तया मार्ग निर्माण पर लगाई रोक

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राजसत्ता न्यूज़ ब्यूरो

नैनीताल, नैनीताल हाईकोर्ट ने आज एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए अल्मोड़ा जिले के सल्ट ब्लॉक में थापला तया मार्ग के निर्माण पर रोक लगा दी है। इस मामले में कोर्ट ने सख्त रुख अख्तियार करते हुए गुरुवार को अल्मोड़ा जिले के जिलाधिकारी व डीएफओ सहित जिला पंचायत अल्मोड़ा को नोटिस जारी कर 24 घण्टे के भीतर विस्तृत रिपोर्ट कोर्ट के समक्ष पेश करने का आदेश दिया था , आज फिर से इस मामले में सुनवाई हुई। अब कोर्ट ने आदेश दिया है की अब अगर रोक के बाद भी सड़क का निर्माण शुरू हुआ तो डीएफओ को जिम्मेदार माना जाएगा । अपने आदेश में कोर्ट ने राजस्व पुलिस को साफ़ किया हैं कि मामले की पूरी जांच करके तीन दिन के भीतर मामले को रेगुलर पुलिस को जांच सौपे । जिस पर पुलिस अपनी जांच करेगी और अभियुक्तों के खिलाफ कार्रवाई की रिपोर्ट 13 जुलाई को हाईकोर्ट में पेश करेगी।

गौरतलब है कि ग्राम सभा थापला तया को मोटर मार्ग से जोड़ने के लिये जिला पंचायत द्वारा सड़क का निर्माण किया जा रहा है, जिसमे ठेकेदार की तरफ से 224 से अधिक महत्वपूर्ण प्रजाति के पेड़ों को काटा दिया गया। काटे गए पेड़ों में पदम,आँवला, खैर,जामुन, तिमिल व आम के पेड़ों को काटा गया है। ग्रामीणों जब इसका विरोध किया तो ठेकेदार द्वारा फायरिंग की गई, जिसके बाद वन दरोगा ने पूरे मामले की पटवारी से रिपोर्ट की मगर उसके बाद भी पेड़ काटने का सिलसिला जारी रहा।

मामले में परेशान होकर रामनगर के खुशाल सिंह रावत ने नैनीताल हाई कोर्ट में जनहित याचिका दाखिल कर कहा कि थापला तया मोटरमार्ग का निर्माण नियम विरुद्ध हो रहा हैं ।जिसमें संरक्षित प्रजाति के 224 पेड़ों को काट दिया गया । याचिका में कहा गया है कि ग्रामीणों ने इसका विरोध किया तो ठेकेदार ने उनको धमकाया और और गांव के आसपास गोलियां भी चलाई , ताकि ग्रामीणों में डर का माहोल बना रहे ।कोर्ट ने गुरुवार को इस मसले में डीएम अल्मोड़ा व डीएफओ सहित जिला पंचायत को नोटिस जारी कर 24 घण्टे के भीतर पूरी रिपोर्ट तलब की थी , इसी पर आज कोर्ट का अगला फैसला आया हैं ।

ग्रामीणों का यह भी आरोप हैं कि शिकायत करने पर भी ठेकेदार के खिलाफ राजस्व पुलिस ने कार्रवाई नहीं कि और अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर दिया । याचिका में दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है। मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने की।

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