Home Uncategorized किसे जाता हैं गैरसैण का क्रेडिट ?

किसे जाता हैं गैरसैण का क्रेडिट ?

266
0

2022 में गैरसैण होगा असली मुद्दा

राकेश चंद्र डंडरियाल

देहरादून। गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाए जाने के बाद उत्तराखंड की राजनीति में मानो भूकंप सा आ गया हैं। बीजेपी को लग रहा हैं कि सत्ता कि कुंजी अब उनके हाथ आ गई हैं , तो कांग्रेस और उत्तराखंड क्रांति दल भी अपनी अपनी डफली अपना राग गाते हुए नजर आ रहे हैं। ये बात सही हैं कि बीजेपी ने 2017 के चुनावी घोषणापत्र में गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाने की बात की थी , जिसे मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह ने बजट सत्र के दौरना अचानक घोषित करके सुर्ख़ियों में आ गए थे। राज्यपाल की मुहर लग जाने के बाद अब एक काम तो पक्का हो गया हैं , जिसके लिए राज्य की जनता लगभग बीस सालों से इंतजार कर रही थी।
कांग्रेस ने भी अपने संकल्पपत्र में गैरसैंण के लिए मुख्यमंत्री कार्यालय की स्थापना के साथ साथ गैरसैण में मुख्यमंत्री कम से कम एक हफ्ते, गैरसैंण से ही राजकीय कार्य करेंगे की बात कही थी , ग्रीष्मकालीन या स्थाई राजधानी जैसी बात कही नहीं थी। यहाँ बीजेपी ने बाजी मार ली कांग्रेस पीछे रह गई।

गैरसैंण राज्य की स्थाई राजधानी बने ये मांग आज की नहीं बल्कि साठ के दशक से चली आ रही हैं , जिसकी शुरुवात पेशावर कांड के महानायक वीर चंद्र सिंह गढ़वाली से हुई थी । बाद में गैरसैंण को उत्तराखंड की राजधानी बनाने की मांग वर्ष 1992 में उत्तराखंड क्रांति दल ने उठाई थी। 9 नवंबर 2000 को उत्तराखंड अस्तित्व में आया, तब से लेकर आज तक गैरसैंण को बीजेपी और कांग्रेस ने फुटबॉल की तरह इस्तेमाल किया ।

पूर्व मुख्यमंत्री और अब बीजेपी नेता विजय बहुगुणा ने 2012 में गैरसैंण में पहली बार कैबिनेट मीटिंग कराने का फैसला किया था। उनके बाद 2014 में मुख्यमंत्री बने हरीश रावत ने टेंटों में विधानसभा सत्र कराए और विधानसभा भवन बनाने के लिए बजट भी दिया। अपने अपने स्तर पर दोनों पार्टियों ने कुछ न कुछ किया , लेकिन अब गैरसैंण के ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाए जाने के बाद सत्ता की बिसात 2022 की और देख रही हैं’,जिसमें शायद गैरसैंण स्थाई राजधानी के रूप में दिखाई देने लगा हैं।

सवाल हैं कि क्या 2022 में होने वाले विधानसभा के चुनाव में कोई राजनैतिक पार्टी यह जोखिम उठाने को तैयार हैं, जो ये वादा करती हो की अगर हम सरकार बनाते हैं तो गैरसैण को स्थाई राजधानी बनाएंगे ? जैसा कि बीजेपी ने अपने घोषणापत्र में किया था ?
क्या बीजेपी व कांग्रेस मैदानी वोटर्स से नाराजगी मोल लेने की स्थिति में हैं , या होंगे , एक बात तो तय हैं कि गैरसैण 2022 का चुनावी मुद्दा होगा । बीजेपी और कांग्रेस इस मुद्दे को पूरी तरह से भुनाने कि कोशिस जरूर करेंगे ,निःसंदेह बीजेपी इसमें लीड ले चुकी हैं जिसका श्रेय त्रिवेंद्र सिंह को जरूर जाना चाहिए।

क्या कहते हैं हरीश रावत

मैं,त्रिवेंद्र सिंह जी को बधाई दूंगा कि, उन्होंने भराड़ीसैंण को उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी नोटिफाई कर दिया है। मगर इतना जरूर उनसे चाहूंगा कि, यदि भराड़ीसैंण, गैरसैंण, ग्रीष्मकालीन राजधानी है और देहरादून अस्थाई राजधानी है, जिसको केंद्र सरकार ने राज्य बनाते वक्त अस्थाई राजधानी कहां है, तो फिर राज्य की राजधानी कहां है?, तो यह एक बड़ा यक्ष प्रश्न है कि, राज्य की राजधानी कहां है?

त्रिवेंद्र सिंह रावत
सवा करोड़ उत्तराखंडवासियों की भावनाओं का सम्मान करते हुए मुझे बेहद खुशी हो रही है कि आज भराड़ीसैंण (गैरसैंण) को ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित किए जाने की अधिसूचना जारी कर दी गई है। राज्य आंदोलनकारियों, मातृशक्ति व शहीदों के सपनों को साकार करने की दिशा में यह मील का पत्थर साबित होगा।

LEAVE A REPLY