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फीलगुड’ विकास का दूसरा नाम। कैरी की सब कुछ हूंद*

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सुधीर सुंदरियाल

नमस्कार। उम्मीदों का माहौल बन गया है। चारों तरफ स्वरोजगार की बातें हो रही हैं। बंजर खेत आबाद होने लगे हैं। ऐसा लग रहा है जैसे स्वरोजगार की बयार चलने लगी हो। हमारे चौबट्टाखाल तहसील क्षेत्र में कई जगह बैलों की जगह पावर टीलर चलने लगे हैं। कुछ समय पहले तक जिन खेतों को यह कहकर छोड़ दिया गया था कि इनमें कुछ नहीं हो सकता, जंगली जानवर कुछ होने नहीं देंगे, आज उन बंजर खेतों को आबाद कर उसे आजीविका का स्रोत बनाने की तैयारियाँ चल रही हैं।
यह सत्य है कि कोरोना वैश्विक महामारी ने बहुतों को बेरोजगार किया है लेकिन यह भी सत्य है कि कोरोना ने पहाड़ों में बहुत युवाओं को अपना स्वरोजगार स्थापना का अवसर भी दिया है।
लॉकडाउन के दौरान उत्पादकता बढ़ाने के लिए शहरों में एअरकंडिशनर हॉल में होने वाले सेमिनारों की जगह अब घर बैठे वेबनारों ने ले ली थी लेकिन इस दौरान भी हम लोग जमीन से जुड़े रहे। हमारी गोष्ठियां खेतों में जारी रही जिन्हें आप खेतनार (खेत खलिहानों की गोष्ठियां) भी कह सकते हैं।
उन युवाओं को जो स्वरोजगार की दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं उनका मनोबल उनके कार्यस्थल पर जाकर बढ़ाना अति आवश्यक था इसलिए गोष्ठियों का नया तरीका उनके खेत खलिहानों या उनके कार्यस्थानों पर जाकर शुरू किया गया। इस खेतनार के तहत हम लोग कई युवाओं की टीम से मिले जो उत्साह से भरपूर थे। जिनकी फड़फड़ाती भुजाएं बंजर खेतों को आबाद करने के लिए तैयार थी। आंखों की विशेष चमक से उनके सपनो का स्वरोजगार मॉडल चमचमा रहा था।
उम्मीदों के ऐसे मॉडल को देखने जब हम लोग एकेश्वर ब्लाक के गुराड पहुंचे तो वहां प्रधान के नेतृत्व में ही एक टीम बंजर को सरसब्ज कर रही थी। बींस, मूली , पहाड़ी मूला टमाटर, बंद गोभी आदि सब्जियां तैयार मिली।
इसी कड़ी में कुछ समय पहले सतपुली के बिलखेत के पास शीला गांव में पलायन एक चिंतन की टीम का पर्यटन और बागवानी के मॉडल को देखने भी गया था। आने वाले दिनों में यह टीम एक नई सोच के साथ एक नया आयाम स्थापित करेगी।
पोखड़ा ब्लॉक में कई जगहों से स्वरोजगार के प्रयासों को देखकर मन बड़ा खुश हुआ। गिंवाली गांव के पास महादेवसेण में जसपाल सिंह जी और विजय सिंह जी ने सागसब्जी का बहुत अच्छा काम शुरू कर दिया है। वहीं पास में सामाजिक क्षेत्र में सक्रिय पूनम कैंतुरा जी बागवानी के मॉडल पर अच्छा काम कर रही हैं।
ग्राम सभा मजगांव मे पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य नरेश सुंदरियाल जी और उनकी टीम ने डेरिफॉर्मिंग, पोल्ट्री और बागवानी के मॉडल पर काम शुरू कर दिया है। ग्राम सभा कुई में समाज सेविका और कवियत्री नूतन तनु पन्त ने मसरूम और बागवानी, अशोक सुंदरियाल और विनोद सुंदरियाल जी ने भी बागवानी के मॉडल पर जुटे हुए हैं।
गडोली की उफरेंधार में वेदपाल सिंह रावत और सन्तोष रावत की टीम मशरूम में एक जाना पहचाना नाम बन गया है। वहीं पर झल्लू में प्रदीप धस्माना ने बागवानी की शुरुवात कर दी है।
ग्राम सभा बस्युर मे युवा प्रधान सुमित रावत और उनकी टीम स्वरोजगार के क्षेत्र में अच्छा काम कर रही है। ये लोग मशरूम पॉलीहाउस बनाकर काम कर रहे हैं।
पोखड़ा ब्लॉक में रायसेरा घाटी एक ऐसी जगह थी जिसमें भरपूर पानी होने के बावजूद कई किलोमीटर का एरिया बंजर पड़ा हुआ था। चार पांच साल पहले से उस घाटी को आबाद करने के हम लोगों ने कई प्रयास किए थे लेकिन आज वहां बड़े सुखद नजारे दिखने लगे हैं। इसी घाटी के ढूंग्याड नामक जगह पर एक मार्च को उम्मीद समन्वित कृषि बागवानी केंद्र की स्थापना हुई थी । आजकल इस केंद्र में दलहन की फसल पर विशेष जोर है। और इस माह 250 फलदार पेड़ लगाने का लक्ष्य रखा हुआ है।
आज इस केंद्र के आसपास चार समूहों ने बहुत अच्छा काम शुरू कर दिया है। किमगडी गांव के बिनील बिष्ट ने “हिट भुला” नाम से एक समूह बनाकर बड़े रूप में बंजर खेतों को आबाद करना शुरू कर दिया है। अभी कई खेतों में सोयाबीन बो चुके हैं।
वहीं पर हरि सिंह और सोहन सिंह पॉलीहाउस में सागसब्जी का अच्छा काम कर रहे हैं। इन्ही के सामने पिछले कुछ सालों से कुलदीप सिंह उर्फ कुली बकरी पालन, मछली पालन और सागसब्जी पर अच्छा काम कर रहे हैं।
इसी समूह से कुछ दूर केसर सिंह गुसाई, बलवीर सिंह रावत और मनोज सिंह साग सब्जी पर बहुत अच्छा काम कर रहे हैं।
इसी घाटी में रायसेरा कृषक समूह नाम से गडोली गांव के रतन सिंह रावत और उनकी टीम ने लगभग 100 नाली जमीन को आबाद कर काम शुरू कर दिया है। इसके अलावा यह समूह बागवानी मसाला और गौशाला पर आगे बढ़ेगा।
रायसेरा घाटी में ही उबोट गांव की दो टीम पूर्व प्रमुख सुरेंद्र सिंह रावत जी के नेतृत्व में दो जगहों पर शानदार काम कर रही हैं। इन सब जगहों पर पावर टीलर चलने लगे हैं। शायद इतने बड़े पैमाने पर बंजर को आबाद करना मशीनों से ही सम्भव हो पाता।
मशीनों से खेती करने का एक अलग ही उत्साह लोगों में देखा जा रहा है। इसीलिए कई सक्षम लोग अपने गांव मे मशीनें गिफ्ट कर रहे हैं। समाजसेवी कवीन्द्र इस्टवाल जी, और पोखड़ा ब्लॉक के पूर्व प्रमुख सुरेंद्र सिंह रावत जी ने भी आने गांव में पावर टीलर गिफ्ट किया है।
ग्राम नाई मंदलिया में इंजीनियर दिवाकर धस्माना जी ने भी बंजर खेत को आबाद करने के लिए गांववासियों को पावर टीलर भेंट किया। मशीन का उत्साह ऎसा था कि बड़े छोटे सभी मशीन पर हाथ आजमा रहे थे। गुरुजी श्री कुंवर सिंह गुसाई जी जो 70साल से ऊपर के हैं उन्होंने भी मशीन पर हाथ आजमाया।
ग्राम वीणा में श्री हरि सिंह बिष्ट जी का पिछले कई सालों से सागसब्जी के काम से सभी क्षेत्रवासी विदित हैं लेकिन आजकल पूरा परिवार पुत्र रोहन बिष्ट जी और अन्य भाई भी उनके मिशन में शामिल होकर सोलर फैंसिंग के साथ सेब की बागवानी पर एक बहुत बड़ा काम कर रहे हैं जो बागवानी पर काम करने वालों के लिए एक बड़ा प्रेरणास्रोत होगा।
ग्राम वीणा में ही ग्राम प्रधान अजय बिष्ट जी और उनकी टीम पॉली हाउस और मछलीपालन पर काम कर रहे हैं।
इन्हीं दिनों में बिजोरापानी में चक्रधर बन्दूनी जी के स्वरोजगार मॉडल को देखने का भी मौका मिला। पॉली हाउस के साथ साग सब्जी, फलदार पेड़, मुर्गीपालन और दुग्ध उत्पाद पर अच्छा काम कर रहे हैं।
कई अन्य गांव के भर्मण कार्यक्रम और मास्क वितरण आदि कार्यों के साथ लॉक डाउन का कार्यकाल मेरे लिए उम्मीदों के माहौल को लॉक ऑन कर गया।
सुधीर सुंदरियाल- ‘भलुलगद/फीलगुड’ ट्रस्ट
12-07-2020

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